प्रथम अध्याय
ॠ) बैज्ञानिक ईश्वरवाद
1) जीव का सृष्टि तत्व
ठ्ठ) मत्सरुपे अवतार भैला प्रथमत।
उद्धारिला वेद प्रभू प्रलय जलत।।(2)
(श्रीमन्त शंकरदेव रचित कीत्र्तन घोषा)
मत्स रुप में अवतार हुए थे शुरुवात में,
प्रभू ने उद्धार किया वेद प्रलय जल से।।(2)
2) पृथिवी का सृष्टि
तामसन हन्ते शब्द गुणर प्रकाश।
शवदरो पुत्र भैला नामत आकाश।।
आकाशत हन्ते परशर उतपति। (पृथिवी का गेछीय अवस्था)
परशर पुत्र भैला वायु महामति।।
वायु हन्ते रुपनामे पुत्र अवतार।
रुपर तनय भैला अग्नि चमत्कार।। 54
अगनिर पुत्र भैला रस महामति। (पृथिवी का तरल अवस्था)
रस गुण हन्ते पाछे जल उतपति।।55
जले उतपति भैला गन्ध गुण नाम। (पृथिवी का कठिन अवस्था)
गन्ध गुण हन्ते वसुमती अनुपाम।। 56
श्रीमन्त शंकरदेव कृत श्रीमद्भागवतः तृतीय स्कन्ध, अनादिपातन)
तामस से हुआ शब्द गुण के प्रकाश,
शब्द से उतपन्न हुआ पुत्र, नाम हैं आकाश।
आकाश से हुआ स्पर्श गुण का सृष्टि,
स्पर्श का पुत्र हैं वायु महामति। 54
वायु से हुआ रुप नामक पुत्र अवतार,
रुप का तनय हैं अग्नि चमतकार।
अग्नि का पुत्र हैं रस महामति,
रस गुण से हुआजल का सृष्टि। 55
जल मे उतपन्न हुआ गन्ध नामक गुणम्,
गन्ध-गुण से हुआ सृष्टि वसुमती अनुपम। 56