करता हुँ व्यक्त मानव शरीर का महिमा, सुन लो,
ब्राहृांड का गुण हैं मानव शरीर में, जान लो।
नारायण ने समस्त चौबीस तत्वों का किया निर्माण,
सम्पूर्ण रुपसे इस का हैं प्रमाण। (201)
पीठ कै मध्य भाग में हैं रीढ़-स्तम्भ का निवास,
रीढ़-स्तम्भ का रैं सारवाइकेल, थोरासिक, लाम्बो-सेक्रेल
सोलह जोड़े बड़े हड्डी से बनता है मानव शरीर का अस्थि-पंजर,
और यह शरीर का निम्न-उद्र्ध भाग में रहता हैं नौ द्वार। (202)
दो कान दो नथुना दो आँखे और,
मुँह के सहित शरीर कार उद्र्ध भाग में हैं सात द्वार,
निम्न भाग में मलद्वार लिंग सहित हो गया नौ द्वार,
और शरीर में होता हैं तंत्रिका रक्त-नलीका सत्तर हजार। (203)
उन सव में होता हैं संचारित दस प्रकार के प्राण-वायु,
और नख-केश तक ले जाते हैं खाद्य रस।
परम तृप्त होते हैं इंद्रिय गण,
बढ़ता हैं शरीर में तेजस्वीता और बल। (204)
उन नाड़ीओ में से तीन हैं प्रधान,
सुषुम्ना पिंगला इड़ा हैं जिसके नाम।
इन तीनो में से हैं सुषुम्ना उत्तम,
जिसका हैं लक्ष्य-स्थान सूर्यमंडलम। (205)
मलद्वार लिंग नाभि ह्मदय सिर और ललाट में
रहता हैं मानव शरीर का छः चक्र,