गंध-गुण स्पर्श शब्द रुप रस,
मन और दस इंद्रिय सहित हैं सोलह।(75)
पंचभुत प्रकृति महत्व और अहंकार,
यह चौबीस तत्वों का करुँगा प्रचार।
इसी तरह सृजन किया चौबीस तत्व महान,
किन्तु ब्राहृांड सृजन का शक्ति था नही किसी में। (76)
तत्पशचात भगवान कृष्ण की किया स्तति तत्तगण,
तफ्रा जीव रुप में सब में प्रवेश किया नारायण।
जग का कारण हैं यह चौबीस महा तत्व,
हरि इच्छा से हो गया सब एकमत।। (77)