ठ्ठ) हेन देखि लगे लैया सहाय अनन्त।
देवकीत जन्मिब आपुनि भगवन्त।।
सि कारने लगे लैया देव संकर्षण।
यदुकुले जन्मिवन्त प्रभू नारायण।। (310)
(श्रीमद्भागवतः एकादश स्कन्ध, निमिनवसिद्ध संवाद)
सहायकारी समदल लेके
देवकी की गर्भमे भगवन्त अवतार होंगे।
देवों के संग मे
कार्य सम्पादन के उद्देश से साथ लेकर
यदुकुल में प्रभु नारायण जन्म लेंगे। (310)
(यह वचन ब्राहृा जी ने शिव जी सहित समस्त देव देवीको कहा था।)
ड) चारि वेद चौद्ध शास्त्रे कृष्णके कहय।
कृष्णरे से अंश सवे जगत निश्चय।। (76)
(श्रीमद्भागवतः द्वितीय स्कन्ध, ब्राहृा-नारद संवाद)
चार वेद चौदह शास्त्र कहते हैं कृष्ण भक्ति,
सारा जग हैं कृष्ण का अंश, यह हैं निश्चित। (76)
- ईश्वर का स्वरुप
ठ्ठ) परम आनन्दमय ईश्वर वही हैं,
माया होती जिसकी वश में।
वही हैं जीव, माया जिसको करते है मर्दन,
और जीवों का होता हैं दुख में ही उदय। (746)
- देव-देवी समाज श्रीकृष्ण में शरण लिए
