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अनादरि आन धर्म माधवर जन्म कर्म
शुणियोक महन्तर मुखे।
जगत प्रसिद्ध नाम कृष्ण विष्णु हरि राम
लाज एरि गाइबे महा सुखे।। (62)
(श्रीमद्भागवतः एकादश स्कन्ध, निमि नव सिद्ध संवाद)
होके अनासक्त अन्त धर्म से, माधवका जन्म कर्म
श्रवण करो महात्माओं से,
जगत प्रसिद्ध नाम कृष्ण, विष्णु हरि राम
छोड़के लज्जा, गाओ सुख से।। (62)

ड़) बौलन्त शुके किनो भैल खेद।
पाषण्डे करिबे बुद्धिक भेद।।
कलित हरिर कीत्र्तन एरि।
फुरिबे लोके आन कम्र्म करि।। (140)
पाइबेक श्रम तप ब्रात करि।
एकान्ते यिटो नुसुमरै हरि।।
ज्ञानतो कम्र्मतो करिया नर।
हरि कीर्तनत करा आदर।। (141)
(कीर्तन घोषाः पाषण्ड मर्दन)
शुक मुनि कहते हैं खेद के सहित,
पाखण्डी लोग करेंगे बुद्धिको भ्रष्ट।
छोड़के हरि कीर्तन कलियुग में,
होंगे लोग मोहित अन्य पन्ठ में।। (140)
जो व्यक्ति हरि स्मरण नहि करेंगे,
मिलेगा बयर्थ श्रम मात्र तप ब्रात करके।
ज्ञान काण्ड और कर्म काण्ड छोड़, हे नर,
हरि कीर्तन की ही करो समादर। (141)