(1) ईश्वर कृष्ण और गुरु श्रीमन्त शंकरदेव जीको स्मरण करना हैं इस तरह से –
कृष्ण शंकर गुरु हरि राम राम
(2) एक वरगीत गाया जाता हैं –
ध्रं – नारायण काहे भकति करो तेरा।
मेरि पामरु मन माधव घने घन
घातुक पाप नाछोड़ा।
पद –
जत जीव जंगम कीट पतंगम
अग नग जग तेरि काया।
सवकहु मारि पुरत उहि उदर
नाहि करत भूत दाया।।(1)
ईश स्वरुपे हरि सव घटे बैठह
जैचन गगन बियापि।
निन्दाबाद पिशुन हिंसा हरि
तेरि करोहो हामु पापी।। (2)
काकु शंकर कय करु करुणानाथ
जो नो छारोहो राम वाणी।
सव अपराधक बाधक तुवा नाम
ताहे शरण लेहु जानि।। (3)
(श्रीमन्त शंकरदेव रचित वरगीत)
राम- धनश्री, ताल- परिताल
3) कृष्ण राम कृष्ण राम
कृष्ण राम कृष्ण राम
कृष्ण कृष्ण राम जय जय जय
कृष्ण कृष्ण राम जय जय जय
कृष्ण कृष्ण राम जय जय जय
कृष्ण कृष्ण राम जय जय जय

कृष्ण हरि राम हरि राम राम राम।
अनंत अच्युत सनातन नारायण प्राण।।(द्धड्ढद्रड्ढठ्ठद्यठ्ठद्यत्दृद)