गोविन्द गोविन्द गोविन्द गोविन्द गोविन्द राम मुरारी।
अंनत कोटि ब्राहृाण्डर हरि अधिकारी।। (द्धड्ढद्रड्ढठ्ठद्यठ्ठद्यत्दृद)

गोविन्द राम मुरारी मुकुन्द राम मुरारी।
भकति रोचन दुःख विमोचन भकतर भयहारी।। (द्धड्ढद्रड्ढठ्ठद्यठ्ठद्यत्दृद)

परम पुरुष परम आनन्द परम गुरु मुरारी।
अनादि अनंत अच्युत गोविन्द भकतर भयहारी।। (द्धड्ढद्रड्ढठ्ठद्यठ्ठद्यत्दृद)

जय जादव ए मोरे प्राण जीवर जीवन नारायण।
भकतर धन तजु अरुण चरण।। (द्धड्ढद्रड्ढठ्ठद्यठ्ठद्यत्दृद)

(4) दिहा घोषा –
ए भावक भाइ भज भगवन्त भक्ति भावे।
भगवन्त भजिया परम गति पावे।।
भगवन्त नभजि चलय यम ठावे।
भगवन्त भकतक शमने नधावे।।
भगवन्त भजिया जनम बाहुरावे।
आन जत सबे मिछा भक्तिर अभावे।।
जानिया भजियो भाइ भगवन्त पावे।
एहु रस माधव मुरुखमति गावे।।
(महापुरुष माधवदेव रचित नामघोषा नामक शास्त्र से लिया गया)