अर्थात, त्त्ददृध्र् त्द्य ड्डड्ढढत्दत्द्यड्ढथ्न्र् ठ्ठडदृद्वद्य ढ़दृदृड्ड त्द द्यण्ड्ढ ध्र्दृद्धथ्ड्ड,
ठ्ठदड्ड द्मड्ढद्धध्त्ड़ड्ढ द्यदृ ड़द्धड्ढठ्ठद्यद्वद्धड्ढ त्द्म द्मड्ढद्धध्त्ड़ड्ढ द्यदृ क्रदृड्ड.
त्त्ददृध्र्त्दढ़ द्यण्त्द्म, ड्ढदद्मद्वद्धड्ढ ढड्ढठ्ठद्धथ्ड्ढद्मद्म ड्ढदध्त्द्धदृदथ्र्ड्ढदद्य द्यदृ ड़द्धड्ढठ्ठद्यद्वद्धड्ढद्म,
ठ्ठदड्ड ड्डदृ द्वद्यद्यड्ढद्ध क्तठ्ठद्धत् क्तठ्ठद्धत् द्यदृ ण्ठ्ठध्ड्ढ ड्डत्ध्त्दड्ढ ण्ठ्ठद्रद्रत्दड्ढद्मद्म.
अर्थात, ज़्ड्ढथ्ढठ्ठद्धड्ढ द्यदृ ड़द्धड्ढठ्ठद्यद्वद्धड्ढ त्द्म द्यण्ड्ढ द्रद्धठ्ठन्र्ड्ढद्ध द्यदृ क्रदृड्ड. ण्ड्ढद्धड्ढ ड़द्धड्ढठ्ठद्यद्वद्धड्ढ त्दड़थ्द्वड्डड्ढद्मण्द्वथ्र्ठ्ठद डड्ढत्दढ़ ठ्ठदड्ड ठ्ठथ्थ् दृद्यण्ड्ढद्ध ठ्ठदत्थ्र्ठ्ठथ्द्म, डत्द्धड्डद्म ड्ढद्यड़. क्ष्द्य त्द्म द्मठ्ठत्ड्ड त्द दृद्यण्ड्ढद्ध ध्र्ठ्ठन्र् द्यण्ठ्ठद्य द्मड्ढद्धध्त्ड़ड्ढ द्यदृ थ्र्ठ्ठद त्द्म द्मड्ढद्धध्त्ड़ड्ढ द्यदृ क्रदृड्ड.
हम सब लोग एक ईश्वर का सन्तान हैं और सभी प्राणीओं ईश्वर का ही क्षुद्र रुप हैं। इसीलिए आपस में प्रेम भाव रखना चाहिए –
कुकुर शृगाल गर्दभरो आत्मा राम।
जानिया सवाको परि करिबा प्रणाम।।
(श्रीमन्त शंकरदेव रचित कीर्तन घोषा)
श्रीमन्त शंकरदेव ने सिद्धान्त दिया था कि ईश्वर ने मानव जाति सृष्टि किया हैं एक मात्र ईश्वर का सृष्टि समूह का संवर्धन और संरक्षण के लिए। इसीलिए मानव समाज ने मानव कल्याण के उपरान्त अन्य प्राणी समूह का भी कल्याण साधन करना चाहिए। वे कहा था कि ईश्वर का वास तर्क युद्ध में नही, परन्तु आचरण तथा कार्य में होता हैं। समाज सेवा, मानव के सहित समग्र प्राणीओका कल्याण साधन और पारिपार्श्विक भारसाम्य रक्षा करणे में ही मनुष्य का धर्म के प्रति दायवद्धता तथा कर्तव्यपरायणता मालुम होता हैं। हम लोगो का यह अनुभव होना साहिए कि हम सफ्रा लोग एक ईश्वर का सन्तान हैं और हम सब लोग कल्याण मुखी कर्म में रत होना चाहिए। गुरुजन ने कहा था विश्वकल्याण मुखी कर्म ही इश्वरमुखी कर्म हैं। भारतवर्ष का एक वृहत् सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान हैं श्रीमन्त शंकरदेव संघ। यह संघ ने दु तिन साल में ही श्रीमन्त शंकरदेव विश्वविद्यालय स्थापना करनेवाला हैं। संघ ने श्रीमन्त शंकरदेव फ्रोंक स्थापना किया हैं। इसके जरिए शिक्षित बेरेजगार युवक युवतीओको संस्थापन देना ही मुख्य उद्देश्य हैं। संघ ने लगभग पेषठ (65) श्रीमन्त शंकरदेव विद्यालय स्थापना किया हैं। विद्यालयको केन्द्रित करके शंकरदेव संगीत विद्यालय समूह का स्थापना हुआ हैं। गहपुर में 300 डड्ढड्डड्ढड्ड चिकित्सालय स्थापना का काम सम्पूर्ण होनेवाला हैं। जनसभा, सेमिनार आदि के जरिए दिल्ली, मुम्बइ, चेन्नाइ, कोलकाता आदि स्थान में श्रीमंत शंकरदेव का रचना समूह का विश्लेषण तथा प्रचार के काम चल रहा हैं। श्रीमन्त शंकरदेव का रचना समूह हिन्दी, बेंगली, उरिया, इंलिच, बड़ो, नेपाली आदि भाषा में अनुवाद हुआ हैं। डब्लिउ. एल. स्मिथ, डः अमलेन्दु चक्रवर्ती, चि.डि. त्रिपाठी, अक्सफोर्ड युनिभार्सिटि का भिजिटिं प्रफेसर एम. नरसिंहचारी आदि प्रसिद्ध पण्डितों ने रिचार्छ की जरिए श्रीमन्त शंकरदेव को विश्व में प्रतिष्ठा किया हैं। निकट भविष्य में श्रीमन्त शंकरदेव संघ ने भारतवर्ष का अन्य राज्य मे भी जगत गुरु श्रीमन्त शंकरदेव केन्द्र विद्यालय (क्एच्क ॠढढत्थ्त्ठ्ठद्यड्ढड्ड) स्थापना करने के लिए चिन्तन मनन कर रहा हैं। उल्लेखनीय हैं कि 2006 का 30द्यण् ग्ठ्ठन्र् में इकनमिक्स टाइमस नामक दिल्ली से प्रकाशित निउज पेपार का उप-सम्पादिका आइरिण अब्राायन ने नीति अनुसार श्रीमन्त शंकरदेव को गुरु मान कर भगवन्त कृष्ण में शरण लिया हैं। इस का उपरान्त भी गुरुजन का पदांक अनुसरण करके श्रीमन्त शंकरदेव संघ ने भारतवर्ष का सभी लोगो के लिए योगासन, प्राणायाम आदि अनुशीलन का ब्यवस्था किया हैं। स्वस्थ और निरोगी शरीर निर्माण के लिए आहार, निद्रा, स्नान, ब्राहृचर्य आदि नीति नियमो का व्यवहारिक शिक्षा प्रदान का व्यवस्था करते आए हैं।

समाप्त